सहदेवद्न मे पुत्र: सदावेक्ष्यो वने वसन् । यथेदं व्यसन प्राप्प नायं सीदेन्महामति:,“बेटी! वनमें रहते हुए मेरे पुत्र सहदेवकी तुम सदा देखभाल रखना, जिससे यह परम बुद्धिमान सहदेव इस भारी संकटमें पड़कर दुःखी न होने पावे”
vaiśaṃpāyana uvāca | sahadevaṃ me putraḥ sadāvekṣyo vane vasan | yathedaṃ vyasanaṃ prāpya nāyaṃ sīden mahāmatiḥ ||
सहदेवो मे पुत्रः सदा वेक्ष्यो वने वसन्। यथेदं व्यसनं प्राप्य नायं सीदेत् महामतिः॥
वैशमग्पायन उवाच