शास्त्र न शास्ति दुर्बुद्धिं श्रेयसे चेतराय च | न वै वृद्धो बालमतिर्भवेद् राजन् कथंचन,“राजन! जिसकी बुद्धि खोटी है, उसे शास्त्र भी भला-बुरा कुछ नहीं सिखा सकता। मन्दबुद्धि बालक वृद्धों-जैसा विवेकशील किसी प्रकार नहीं हो सकता
śāstraṁ na śāsti durbuddhiṁ śreyase cetarāya ca | na vai vṛddho bālamatir bhaved rājan kathaṁcana ||
वैशम्पायन उवाच—राजन्, शास्त्रं न शास्ति दुर्बुद्धिं न श्रेयसे न चाप्यनर्थनिवृत्तये। न हि वृद्धो भवेत् कश्चिद् बालमति: कथञ्चन॥
वैशम्पायन उवाच