पुनर्द्यूत-समाह्वानम्
Renewed Summons to the Dice-Game and Exile Wager
जो केश राजसूय महायज्ञके अवभृथस्नानमें मन्त्रपूत जलसे सींचे गये थे, उन्हींको दुःशासनने पाण्डवोंके पराक्रमकी अवहेलना करके बलपूर्वक पकड़ लिया ।।
स तां पराकृष्य सभासमीपमानयत् कृष्णामतिदीर्घकेशीम्। दुःशासनो नाथवतीमनाथवच्चकर्ष वायुः कदलीमिवार्ताम्।
दुर्योधन उवाच