Adhyāya 59: Vidura’s Admonition to Duryodhana after the Summons of Draupadī (सभा पर्व)
अक्षेहि शिक्षितो5भ्येति निकृत्यैव युधिष्ठिर । विद्वानविदुषो5भ्येति नाहुस्तां निकृतिं जना:,धर्मराज! जो द्यूतविद्यामें पूर्ण शिक्षित है, वह अशिक्षितोंपर शठतासे ही विजय पाता है। विद्वान् पुरुष अविद्वानोंको जो परास्त करता है, वह भी शठता ही है; किंतु लोग उसे शठता नहीं कहते
akṣaiḥ śikṣito 'bhyeti nikṛtyaiva yudhiṣṭhira | vidvān aviduṣo 'bhyeti nāhus tāṁ nikṛtiṁ janāḥ ||
युधिष्ठिर उवाच—अक्षेषु शिक्षितोऽभ्येति निकृत्यैव युधिष्ठिर। विद्वानविदुषोऽभ्येति नाहुस्तां निकृतिं जनाः॥
युधिषछिर उवाच