Jarāsandha-nipātana, rāja-mokṣa, and rājasūya-sāhāyya-prārthanā
Jarāsandha’s fall, liberation of kings, and request for support
सवर्णो हि सवर्णानां पशुसंज्ञां करिष्यसि । को<न्य एवं यथा हि त्वं जरासंध वृथामति:,जरासंध! तुम्हारी बुद्धि मारी गयी है, तुम भी उसी वर्णके हो, जिस वर्णके वे राजालोग हैं। क्या तुम अपने ही वर्णके लोगोंको पशुनाम देकर उनकी हत्या करोगे? तुम्हारे-जैसा क्रूर दूसरा कौन है?
सवर्णो हि सवर्णानां पशुसंज्ञां करिष्यसि । कोऽन्य एवं यथा हि त्वं जरासन्ध वृथामतिः ॥
श्रीकृष्ण उवाच