एष श्रिय: समुदिता: सर्वराज्ञां ग्रहीष्यति । वर्षास्विवोदीर्णजला नदीर्नदनदीपति:,“यह समस्त राजाओंकी संगृहीत सम्पदाओंको उसी प्रकार अपने अधिकारमें कर लेगा, जैसे नदों और नदियोंका अधिपति समुद्र वर्षा-ऋतुमें बढ़े हुए जलवाली नदियोंको अपनेमें मिला लेता है
एष श्रियः समुदिताः सर्वराज्ञां ग्रहीष्यति । वर्षास्विवोदीर्णजला नदीर्नदनदीपतिः ॥
श्रीकृष्ण उवाच