कर्णके ध्वजपर जो हाथीकी साँकल थी, वह कालपाशके समान जान पड़ती थी। वह लोहनिर्मित हाथीकी साँकल छोटी-छोटी घण्टियोंसे विभूषित थी। उसने अत्यन्त कुपित होकर उस वानरपर धावा किया ।। तयोघोरितरे युद्धे द्वेरथे द्यृूत आहिते । प्रकुर्वाते ध्वजौ युद्ध पूर्व पूर्वतरं तदा,उन दोनोंमें घोरतर द्वैरथ युद्धरूपी जूएका अवसर उपस्थित था, इसीलिये उन दोनोंकी ध्वजाओंने पहले स्वयं ही युद्ध आरम्भ कर दिया
sañjaya uvāca |
karṇake dhvajapara yā hastikī sāṅkal thī sā kālapāśa-samān jān paṛtī thī | sā loha-nirmita hastikī sāṅkal choṭī-choṭī ghaṇṭiyoṃ-se vibhūṣit thī | usne atyanta kupit hokar us vānara-par dhāvā kiyā ||
tayor ghoritare yuddhe dvairathe dyūta āhite | prakurvāte dhvajau yuddhaṃ pūrvaṃ pūrva-taraṃ tadā ||
सञ्जय उवाच—कर्णध्वजस्थे सा लोहमयी हस्तिकक्ष्या किड्किणीकाभरणा कालपाशोपमा बभूव। सा तं कपिं प्रति क्रुद्धा वेगेनाभ्यद्रवत्। तयोर्घोरतरे द्वैरथे युद्धे द्यूत आहिते, ध्वजौ तदा पूर्वमेव युद्धं प्राकुर्वातामिव॥
संजय उवाच