श्वेताश्लौ पुरुषौ दिव्यावास्थितावरिमर्दनौ | शुशुभाते महात्मानौ चन्द्रादित्यौ यथा दिवि,दोनोंके घोड़े सफेद रंगके थे। दोनों ही दिव्य पुरुष और शत्रुओंका मर्दन करनेमें समर्थ थे। वे दोनों महामनस्वी वीर आकाशमें चन्द्रमा और सूर्यके समान रणभूमिमें शोभा पा रहे थे
श्वेताश्वौ पुरुषौ दिव्यावास्थितौ रिपुमर्दनौ। शुशुभाते महात्मानौ चन्द्रादित्यौ यथा दिवि॥
संजय उवाच