(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ८ ३ श्लोक मिलाकर कुल ४४३ “लोक हैं।) भीकम (2 अमान ग्रय्शीतितमो<ध्याय: भीमद्वारा दुःशासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्गार संजय उवाच तत्राकरोद् दुष्करं राजपुत्रो दुःशासनस्तुमुलं युद्ध्यमान: । चिच्छेद भीमस्य धनु: शरेण षष्ट्या शरै: सारथिमप्यविध्यत्,संजय कहते हैं--राजन्! वहाँ तुमुल युद्ध करते हुए राजकुमार दुःशासनने दुष्कर पराक्रम प्रकट किया। उसने एक बाणसे भीमसेनका धनुष काट डाला और साठ बाणोंसे उनके सारथिको भी घायल कर दिया
sañjaya uvāca | tatrākarod duṣkaraṃ rājaputro duḥśāsanas tumulaṃ yuddhyamānaḥ | ciccheda bhīmasya dhanuḥ śareṇa ṣaṣṭyā śaraiḥ sārathim apy avidhyat |
संजय उवाच—तत्राकरोद्दुष्करं राजपुत्रो दुःशासनस्तुमुलं युद्ध्यमानः। चिच्छेद भीमस्य धनुः शरेण षष्ट्या शरैः सारथिमप्यविध्यत्॥
संजय उवाच