आपूर्यते कौरवी चाप्यभीक्षणं सेना हासौ सुभृशं हन्यमाना । धनंजयस्याशनितुल्यवेगै- ग्रेस््ता शरै: काउचनबर्हिबाजै:,अर्जुनके बाण वज्रके समान वेगशाली हैं। उनमें सोने और मयूरपिच्छके पंख लगे हैं। उन बाणोंद्वारा आक्रान्त हुई यह कौरव-सेना अत्यन्त मार पड़नेके कारण बारंबार आर्तनाद कर रही है
āpūryate kauravī cāpy abhīkṣṇaṁ senā hāsau subhṛśaṁ hanyamānā | dhanaṁjayasya aśanitulya-vegair agreṣṭhaiḥ śaraiḥ kāñcana-barhibājaiḥ ||
भीमसेन उवाच—आपूर्यते कौरवी चाप्यभीक्षणं सेना हाहासुभृशं हन्यमाना। धनंजयस्याशनितुल्यवेगैः श्रेष्ठैः शरैः काञ्चनबर्हिबाजैः॥
भीमसेन उवाच