अर्जुनकर्णसंनिपातवर्णनम् / The Convergence of Arjuna and Karṇa
यः सर्वतः पर्यपतत्त्वदर्थे सदार्चितो गर्वित: सूतपुत्र: । स शूरमानी समरे समेत्य कच्चित्त्वया निहत: संयुगेडसौ,जो सदा सम्मानित होकर घमंडमें भरा हुआ सूतपुत्र तुम्हारे लिये सब ओर धावा किया करता था, अपनेको शूरवीर माननेवाले उस कर्णको समरांगणमें उसके साथ युद्ध करके क्या तुमने मार डाला है?
yaḥ sarvataḥ paryapatat tvad-arthe sadārcito garvitaḥ sūta-putraḥ | sa śūra-mānī samare sametya kaccit tvayā nihataḥ saṃyuge 'sau ||
युधिष्ठिर उवाच—यः सर्वतः पर्यपतत् त्वदर्थे सदार्चितो गर्वितः सूतपुत्रः। स शूरमानी समरे समेत्य कच्चित्त्वया निहतः संयुगेऽसौ॥
युधिषछ्िर उवाच