दुःशासनवधः (Duḥśāsana-vadha) — Bhīma’s vow-fulfillment in combat
यत्र यत्र स धर्मात्मा दुष्टां दृष्टिं व्यसर्जयत् । तत्र तत्र व्यशीर्यन्त तावका भरतर्षभ,भरतश्रेष्ठ! धर्मात्मा युधिष्ठिर शिलापर तेज किये हुए कंकपत्रयुक्त एवं नाना प्रकारके पैने बाणों, भाँति-भाँतिके बहुसंख्यक भल्लों तथा शक्ति, ऋष्टि एवं मूसलोंद्वारा प्रहार करते हुए जहाँ-जहाँ क्रोधरूपी दोषसे पूर्ण दृष्टि डालते थे, वहीं-वहीं आपके सैनिक छित्न-भिन्न होकर बिखर जाते थे
sañjaya uvāca | yatra yatra sa dharmātmā duṣṭāṃ dṛṣṭiṃ vyasarjayat | tatra tatra vyaśīryanta tāvakā bharatarṣabha ||
यत्र यत्र स धर्मात्मा दुष्टां दृष्टिं व्यसर्जयत्। तत्र तत्र व्यशीर्यन्त तावका भरतर्षभ॥
संजय उवाच