युधिष्ठिरस्य धनंजय-प्रति गर्हा
Yudhiṣṭhira’s Reproach to Dhanaṃjaya
नानाप्रहरणैश्नोग्रै रथहस्त्यश्वसादिभि: । सर्वतो<भ्यद्रवत् कर्ण परिवार्य जिघांसया,पांचालवीर जनमेजयने रथ, हाथी और घुड़सवारोंकी सेना साथ लेकर सब ओरसे कर्णपर धावा किया और उसे मार डालनेकी इच्छासे घेरकर बाण, वाराहकर्ण, नाराच, नालीक, पैने बाण, वत्सदन्त, विपाठ, क्षुरप्र, चटकामुख तथा नाना प्रकारके भयंकर अस्त्र- शस्त्रोंद्वारा चोट पहुँचाना आरम्भ किया
sañjaya uvāca |
nānāpraharaṇaiś cogrāi rathahasty-aśvasādibhiḥ |
sarvato 'bhyadravat karṇaṃ parivārya jighāṃsayā ||
सञ्जय उवाच—नानाप्रहरणैरुग्रै रथहस्त्यश्वसादिभिः । सर्वतोऽभ्यद्रवत्कर्णं परिवार्य जिघांसया ॥
संजय उवाच