कर्णभीमसमागमः | Karṇa–Bhīma Encounter
संजय उवाच तथेति राजन पुत्रस्ते सह कर्णेन मारिष । अब्रवीन्मद्रराजानं सर्वक्षत्रस्थ संनिधौ,संजय कहते हैं--माननीय नरेश! तब समस्त क्षत्रियोंके समीप कर्णसहित आपके पुत्रने मद्रराज शल्यसे कहा--“बहुत अच्छा, आपकी शर्त स्वीकार है”
sañjaya uvāca | tatheti rājan putras te saha karṇena māriṣa | abravīn madrarājānaṃ sarvakṣatrastha-sannidhau |
संजय उवाच—तथेति राजन् पुत्रस्ते सह कर्णेन मारिष । अब्रवीन्मद्रराजानं सर्वक्षत्रस्थ संनिधौ॥
संजय उवाच