Karṇa-parva Adhyāya 19 — Saṃśaptaka–Trigarta Assault and Aindra-astra Counter
सूतमेकेषुणा हत्वा महाजलदनि:स्वनम् । धनुश्कित्त्वार्थचन्द्रेण तिलशो व्यधमद् रथम्,फिर एक बाणसे सारथिको मारकर महान् मेघके समान गम्भीर शब्द करनेवाले उनके धनुषको भी अर्धचन्द्राकार बाणके द्वारा काट दिया और उनके रथको तिल-तिल करके नष्ट कर डाला
sūtam ekeṣuṇā hatvā mahājaladaniḥsvanam | dhanuś chittvārthacandreṇa tilaśo vyadhamad ratham ||
सूतमेकॆषुणा हत्वा महाजलदनिःस्वनम्। धनुश्छित्त्वार्धचन्द्रेण तिलशो व्यधमद्रथम्॥
संजय उवाच