Bhīmasena–Drauṇi Mahāyuddha
Chariot Duel and Astra-Exchange
एको ह्वात्र महेष्वास: सूतपुत्रो विराजते । सदेवासुरगन्धर्वै: सकिन्नरमहोरगै:,“इस सेनामें एकमात्र महाधनुर्धर सूतपुत्र कर्ण विराजमान है, जो रथियोंमें श्रेष्ठ है तथा जिसे देवता, असुर, गन्धर्व, किन्नर, बड़े-बड़े नाग एवं चराचर प्राणियोंसहित तीनों लोकोंके लोग मिलकर भी नहीं जीत सकते। महाबाहु फाल्गुन! आज उसी कर्णको मारकर तुम्हारी विजय होगी और मेरे हृदयमें बारह वर्षोंसे जो सेल कसक रहा है, वह निकल जायगा। महाबाहो! ऐसा जानकर तुम्हारी जैसी इच्छा हो, वैसे व्यूहकी रचना करो”
eko hvātra maheṣvāsaḥ sūtaputro virājate | sadevāsuragandharvaiḥ sakinnarimahoragaiḥ ||
एको ह्यत्र महेष्वासः सूतपुत्रो विराजते । सदेवासुरगन्धर्वैः सकिन्नरमहोरगैः ॥
संजय उवाच