Adhyāya 10: Śrutakarmā’s Engagements; Prativindhya–Citra Duel; Drauṇi Advances toward Bhīma
आचार्यपुत्रो मेधावी वाक्यज्ञों वाक्यमाददे । युद्धमें प्राणोंकी आहुति देनेकी इच्छा रखनेवाले उन नरेशोंकी चेष्टाएँ देखकर राजा दुर्योधनके प्रातःकालीन सूर्यके समान तेजस्वी मुखकी ओर दृष्टिपात करके वाक्यविशारद, मेधावी आचार्यपुत्र अश्वत्थामाने यह बात कही--
आचार्यपुत्रो मेधावी वाक्यज्ञो वाक्यमाददे। युद्धे प्राणाहुतिमिच्छतां नृपाणां चेष्टितानि निरीक्ष्य, प्रातःसूर्यसमप्रभं दुर्योधनस्य मुखं प्रति दृष्टिं कृत्वा, वाक्यविशारदः स मेधावी अश्वत्थामा इदं वचनमब्रवीत्—
संजय उवाच