द्रोण–सात्यकि द्वैरथम्
Droṇa and Sātyaki: The Chariot Duel
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ ६ श्लोक मिलाकर कुल ९१३ “लोक हैं।) न२्््य्न्नितास श््यु नी नल त्रिसप्ततितमो< ध्याय: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा युधिछिर उवाच त्वयि याते महाबाहो संशप्तकबल प्रति । प्रयत्नमकरोत् तीव्रमाचार्यो ग्रहणे मम,युधिष्ठिर बोले--महाबाहो! जब तुम संशप्तक सेनाके साथ युद्धके लिये चले गये, उस समय आचार्य द्रोणने मुझे पकड़नेके लिये घोर प्रयत्न किया
yudhiṣṭhira uvāca | tvayi yāte mahābāho saṃśaptakabala prati | prayatnam akarot tīvram ācāryo grahaṇe mama ||
युधिष्ठिर उवाच—त्वयि याते महाबाहो संशप्तकबलं प्रति, आचार्यो द्रोणो मां ग्रहीतुं तीव्रं प्रयत्नमकरोत्।
युधिछिर उवाच