धृष्टद्युम्नस्य द्रोणरथारोহণं सात्यकेः प्रतिरक्षणं च | Dhrishtadyumna Boards Droṇa’s Chariot; Sātyaki’s Counter-Protection
यदि पुत्र न पश्यामि यास्यामि यमसादनम् । '“रथियोंकी गणना होते समय जो महारथी गिना गया था, जिसे युद्धमें मेरी अपेक्षा ड्यौढ़ा समझा जाता था तथा अपनी भुजाओंसे सुशोभित होनेवाला जो तरुण वीर प्रद्यम्नको, श्रीकृष्णको और मुझे भी सदैव प्रिय था, उस पुत्रको यदि मैं नहीं देखूँगा तो यमराजके लोकमें चला जाऊँगा ।। ३३-३४ ई ।। सुनसं सुललाटान्तं स्वक्षिभ्रृद्शनच्छदम्
yadi putra na paśyāmi yāsyāmi yamasādanam |
यदि पुत्रं न पश्यामि यास्यामि यमसादनम् । सुनासं सुललाटान्तं स्वक्षिभ्रूर्दशनच्छदम् ॥
संजय उवाच