यत्र युध्यामहे सर्वे धनलो भात् समागता: । हमें धनसे या धन पानेकी इच्छासे क्या प्रयोजन है? जो हम सब लोग यहाँ धनके लोभसे एकत्र होकर जूझ रहे हैं
yatra yudhyāmahe sarve dhanalobhāt samāgatāḥ |
यत्र युध्यामहे सर्वे धनलोभात् समागताः । धनं वा धनलिप्सा वा किमर्थं नः परंतप॥
दुर्योधन उवाच