वासवी-शक्तेः प्रयोगः, घटोत्कच-वधोत्तर-शोकः, व्यासोपदेशश्च
The Vāsavī Spear’s Use, Post-Ghaṭotkaca Grief, and Vyāsa’s Counsel
युगान्तकालसमये दण्डहस्तमिवान्तकम् | प्रलयकालमें दण्डधारी यमराजके समान विशाल धनुष उठाये घटोत्कचको देखकर समस्त राजा व्यथित हो उठे || ६२ ई ।। ततस्तं गिरिशुद्भाभं भीमरूपं भयावहम्,वह देखनेमें पर्वत-शिखरके समान जान पड़ता था। उसका रूप भयानक होनेके कारण वह सबको भयंकर प्रतीत होता था। उसका मुख यों ही बड़ा भीषण था; किंतु दाढ़ोंक कारण और भी विकराल हो उठा था। उसके कान कील या खूँटेके समान जान पड़ते थे। ठोढ़ी बहुत बड़ी थी। बाल ऊपरकी ओर उठे हुए थे। आँखें डरावनी थीं। मुख आगके समान प्रज्वलित था, पेट भीतरकी ओर धँसा हुआ था। उसके गलेका छेद बहुत बड़े गड़्ढेके समान जान पड़ता था। सिरके बाल किरीटसे ढके हुए थे। वह मुँह बाये हुए यमराजके समान समस्त प्राणियोंके मनमें त्रास उत्पन्न करनेवाला था। शत्रुओंको क्षुब्ध कर देनेवाले प्रजजलित अग्निके समान राक्षसराज घटोत्कचको विशाल धनुष उठाये आते देख आपके पुत्रकी सेना भयसे पीड़ित एवं क्षुब्ध हो उठी, मानो वायुसे विक्षुब्ध हुई गंगामें भयानक भँवरें और ऊँची-ऊँची लहरें उठ रही हों
yugāntakālasamaye daṇḍahastam ivāntakam | pralayakāle daṇḍadhārī yamarājake samāna viśāla dhanuṣa uṭhāye ghaṭotkaca-ko dekhakara samasta rājā vyathita ho uṭhe || 62 || tataḥ taṃ giriśuddhābhaṃ bhīmarūpaṃ bhayāvaham |
सञ्जय उवाच—युगान्तकालसमये दण्डहस्तमिवान्तकम्, प्रलयकाले यममिव दण्डपाणिं महाचापोद्यतं घटोत्कचं दृष्ट्वा नृपाः सर्वे व्यथिताः। स गिरिशृङ्गसमाभासो भीमरूपो भयावहः; दंष्ट्राभिः करालो मुखं, शङ्कुकर्णो महाहनुः, ऊर्ध्वकेशो विरूपाक्षो दीप्तास्यो निम्नितोदरः। महागर्तसमं कण्ठविवरं, किरीटच्छन्नमूर्धजं, व्यात्ताननमिवान्तकं सर्वभूतत्रासनम्। स राक्षसराजो घटोत्कचः शत्रूणां क्षोभकरो दीप्ताग्निरिव महाचापमुद्यम्याभ्यपतत्; तं दृष्ट्वा तव पुत्रस्य सेना भयपीडिता क्षुब्धा चाभवत्, वातविक्षुब्धा गङ्गेव भयानकभ्रमरैः ऊर्मिभिश्च।
सयजय उवाच
The passage highlights how adharma-driven violence culminates in overwhelming fear and moral reckoning: Ghaṭotkaca is framed through Yama/pralaya imagery, suggesting that war unleashes forces that feel like cosmic judgment, shaking even kings and armies.
Sañjaya describes Ghaṭotkaca entering the battlefield with a huge bow. His monstrous, blazing appearance terrifies the assembled kings and causes Duryodhana’s army to panic and churn like a storm-tossed Gaṅgā.