घटोत्कच-कर्णयुद्धम्
Ghaṭotkaca–Karna Combat and the Release of Śakti
आचार्य: स्थविरो राजन् शीघ्रयाने तथाक्षम: । बाहुव्यायामचेष्टायामशक्तस्तु नराधिप,राजन! नरेश्वर! आचार्य द्रोण अब बूढ़े हुए। वे शीघ्रतापूर्वक चलनेमें भी असमर्थ हैं। भुजाओंद्वारा परिश्रमपूर्वक की जानेवाली प्रत्येक चेष्टामें अब उनकी शक्ति उतनी काम नहीं देती है
आचार्यः स्थविरो राजन् शीघ्रयाने तथाक्षमः । बाहुव्यायामचेष्टायामशक्तस्तु नराधिप ॥
कर्ण उवाच