धृष्टद्युम्नस्य द्रोणाभिमुख्यं तथा सात्यकि-कर्ण-समागमः
Dhṛṣṭadyumna’s advance toward Droṇa and the Sātyaki–Karṇa confrontation
संजय उवाच एवमुक्ते महाराज सर्वे कौरवपुड्रवा: । न सम किंचिदभाषन्त मनसा समपूजयन्,संजय कहते हैं--महाराज! सात्यकिके ऐसा कहनेपर समस्त श्रेष्ठ कौरवोंने उसके उत्तरमें कुछ नहीं कहा। वे मन-ही-मन उनकी प्रशंसा करने लगे
sañjaya uvāca evam ukte mahārāja sarve kaurava-puṅgavāḥ | na sama kiñcid abhāṣanta manasā samapūjayan ||
संजय उवाच एवमुक्ते महाराज सर्वे कौरवपुङ्गवाः । न समं किञ्चिदभाषन्त मनसा समपूजयन् ॥
संजय उवाच