भीमसेन-दुर्योधन-प्रहारः तथा घटोत्कचमायाप्रादुर्भावः | Bhīmasena–Duryodhana Clash and the Manifestation of Ghaṭotkaca’s Māyā
भेरीशब्दैश्व विमलैविमिश्रै: शड्खनि:स्वनै: । क्ष्वेडितास्फोटितोत्क्रुष्टैर्नादिता: सर्वतोी दिश:,उस समय रणभेरियाँ बज रही थीं। उनके निर्मल शब्दोंसे मिली हुई शंख-ध्वनियों तथा गर्जनसे, ताल ठोंकने और उच्चस्वरसे पुकारने आदिके शब्दोंसे सम्पूर्ण दिशाएँ गूँज उठी थीं
भेरीशब्दैश्च विमलैर्विमिश्रैः शङ्खनिःस्वनैः । क्ष्वेडितास्फोटিতोत्क्रुष्टैर्नादिताः सर्वतो दिशः ॥
संजय उवाच