Chapter 43: Tumult of Battle-Sounds and the Proliferation of Dvandva
Paired Engagements
सम्बन्ध-- यह जीवात्मा मनसहित छः: इन्द्रियोंको किस समय, किस प्रकार और किसलिये आकर्षित करता है तथा वे मनसहित छः इन्द्रियाँ कौन-कौन हैं -ऐसी जिज्ञासा होनेपर अब दो श्लोकोंगें इसका उत्तर दिया जाता है-- शरीरं यदवाप्रोति यच्चाप्युत्क्रामती श्वर:* । गृहीत्वैतानि” संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात्,वायु गन्धके स्थानसे गन्धको जैसे ग्रहण करके ले जाता है, वैसे ही देहादिका स्वामी जीवात्मा भी जिस शरीरका त्याग करता है, उससे इन मनसहित इन्द्रियोंको ग्रहण करके फिर जिस शरीरको प्राप्त होता है, उसमें जाता हैः
śarīraṁ yad avāpnoti yac cāpy utkrāmatīśvaraḥ | gṛhītvaitāni saṁyāti vāyur gandhān ivāśayāt ||
यथा देही शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः । गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् ॥
अजुन उवाच