Kurukṣetra-sainyadarśana and Arjuna-viṣāda (धर्मक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः — अर्जुनविषाद)
संजय उवाच एवमुक्तो<र्जुन: संख्ये वासुदेवेन धीमता । अवतीर्य रथात् पार्थ: स्तोत्रमाह कृताज्जलि:,संजय कहते हैं--परम बुद्धिमान् भगवान् वासुदेवके द्वारा रणक्षेत्रमें इस प्रकार आदेश प्राप्त होनेपर कुन्तीकुमार अर्जुन रथसे नीचे उतरकर दुगदिवीकी स्तुति करने लगे
संजय उवाच—एवमुक्तोऽर्जुनः संख्ये वासुदेवेन धीमता। अवतीर्य रथात् पार्थः स्तोत्रमाह कृताञ्जलिः॥
संजय उवाच