Bhīṣma-nipāta-saṃvāda — Sañjaya’s Report of Bhīṣma’s Fall (भीष्मनिपातसंवादः)
मौर्वीघोषस्तनयित्नु: पृषत्कपृषतो महान् । धनुर्ह्ाादमहाशब्दो महामेघ इवोजन्नत:,वे युद्धमें महान् मेघके समान ऊँचे उठे हुए थे। धनुषकी टंकार ही उनकी गर्जना थी बाण ही उनके लिये वर्षाकी बूँदें थीं और धनुषका महान् शब्द ही बिजलीकी गड़गड़ाहटका भयंकर शब्द था
युद्धे स महान् मेघ इवोन्नतः। मौर्वीघोषस्तस्य तनयित्नुः, पृषत्काः पृषतो महान्; धनुर्हादमहाशब्दो विद्युद्गर्जितसन्निभः।
धृतराष्ट उवाच