विधूय तान् बाणगणान् ये मुक्ता: पार्थिवोत्तमै: ४८ ।। पाण्डवानामदीनात्मा व्यगाहत वरूथिनीम् । परंतु उदारचेता भीष्म उन श्रेष्ठ राजाओंके छोड़े हुए समस्त बाणसमूहोंका नाश करके पाण्डवोंकी विशाल सेनामें घुस गये ।। ४८ है ।। चक्रे शरविघातं च क्रीडन्निव पितामह:,वहाँ पितामह भीष्म खेल-सा करते हुए अपने बाणोंद्वारा पाण्डवसैनिकोंके अस्त्र- शस्त्रोंका विनाश करने लगे। परंतु शिखण्डीके स्त्रीत्वका स्मरण करके वे बारंबार मुसकराकर रह जाते थे; उसपर बाण नहीं चलाते थे
vidhūya tān bāṇagaṇān ye muktāḥ pārthivottamaiḥ | pāṇḍavānām adīnātma vyagāhat varūthinīm || cakre śaravighātaṃ ca krīḍann iva pitāmahaḥ |
विधूय तान् बाणगणान् ये मुक्ताः पार्थिवोत्तमैः । पाण्डवानामदीनात्मा व्यगाहत वरूथिनीम् ॥ चक्रे शरविघातं च क्रीडन्निव पितामहः ॥
संजय उवाच