न कथउज्चन कौन्तेय मयि जीवति संयुगे । जयो भवति सर्वज्ञ सत्यमेतद् ब्रवीमि ते,तब पाण्डुके पितृतुल्य शान्तनुकुमार भीष्मजीने पाण्डवोंसे इस प्रकार कहा --'कुन्तीकुमार! मेरे जीते-जी युद्धमें किसी प्रकार तुम्हारी विजय नहीं हो सकती। सर्वज्ञ! मैं तुमसे यह सच्ची बात कहता हूँ
न कश्चन कौन्तेय मयि जीवति संयुगे। जयो भवति सर्वज्ञ सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥
संजय उवाच