गौतम उवाच दक्षिणा परितोषो वै गुरूणां सद्धिरुच्यते तव ह्याचरतो ब्रह्ांस्तुष्टो 5हं वै न संशय:,गौतमने कहा--ब्रह्मन्! सत्पुरुष कहते हैं कि गुरुजनोंको संतुष्ट करना ही उनके लिये सबसे उत्तम दक्षिणा है। तुमने जो सेवा की है, उससे मैं बहुत संतुष्ट हूँ, इसमें संशय नहीं है
गौतम उवाच—दक्षिणा परितोषो वै गुरूणां सद्भिरुच्यते । तव ह्याचरतः ब्रह्मन् तुष्टोऽहं वै न संशयः ॥
गौतम उवाच