Uttanka’s Guru-Śuśrūṣā and the Commission to Retrieve the Maṇikuṇḍalas (उत्तङ्क-गुरुशुश्रूषा तथा मणिकुण्डल-आदेशः)
तमब्रवीत् पुनः कृष्णो मा त्वमत्र विचारय । अवश्यमेतत् कर्तव्यममोघं दर्शन॑ मम,यह सुनकर श्रीकृष्णने फिर कहा--'मुने! आप इसमें कोई अन्यथा विचार न करें। आपको अवश्य ही मुझसे वर माँगना चाहिये; क्योंकि मेरा दर्शन अमोघ है”
tam abravīt punaḥ kṛṣṇo mā tvam atra vicāraya | avaśyam etat kartavyam amoghaṃ darśanaṃ mama ||
तमब्रवीत् पुनः कृष्णो मा त्वमत्र विचारय । अवश्यमेतत् कर्तव्यममोघं दर्शनं मम ॥
वैशम्पायन उवाच