सप्तहोतृ-विधानम् एवं इन्द्रिय–मनःसंवादः
The Seven Hotṛs and the Debate of Senses and Mind
अपन बछ। है २ >> द्ाविशोदष्ध्याय: मन-बुद्धि और इन्द्रियरूप सप्त होताओंका, यज्ञ तथा मन- इन्द्रिय-संवादका वर्णन ब्राह्मण उवाच अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । सुभगे सप्तहोतृणां विधानमिह यादृशम्,ब्राह्मणने कहा--सुभगे! इसी विषयमें इस पुरातन इतिहासका भी उदाहरण दिया जाता है। सात होताओंके यज्ञका जैसा विधान है, उसे सुनो
brāhmaṇa uvāca | atrāpy udāharantīmam itihāsaṁ purātanam | subhage sapta-hotṝṇāṁ vidhānam iha yādṛśam |
ब्राह्मण उवाच—अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्। सुभगे! सप्तहोतॄणां विधानमिह यादृशम्, तच्छृणु॥
ब्राह्मण उवाच