Bhāgīrathī-tīra-śauca, Kurukṣetra-gamana, and Śatayūpa-āśrama-dīkṣā (गङ्गातीरशौच–कुरुक्षेत्रगमन–शतयूपाश्रमदीक्षा)
विदुरका सूक्ष्मशरीरसे युधिष्ठिरमें प्रवेश युधिछिर उवाच कच्चित् ते वर्धते राजंस्तपो दमशमौ च ते,युधिष्ठिर बोले--राजन्! (मेरे यहाँ सब कुशल है) आपके तप, इन्द्रियसंयम और मनोनिग्रह आदि सदगुणोंकी वृद्धि तो हो रही है न? ये मेरी माता कुन्ती आपकी सेवा- शुश्रूषा करनेमें क्लेशका अनुभव तो नहीं करतीं? क्या इनका वनवास सफल होगा?
Yudhiṣṭhira uvāca: kaccit te vardhate rājan tapo damaśamau ca te?
युधिष्ठिर उवाच—कच्चित् ते वर्धते राजंस्तपः दमशमौ च ते?
युधिछिर उवाच