Karma-Phala Rahasya and the Ethics of Dāna (कर्मफल-रहस्यं दानधर्मश्च)
येन प्रीणात्युपाध्यायं तेन स्याद् ब्रह्म पूजितम् । मनुष्य जिस व्यवहारसे पिताको प्रसन्न करता है, उससे भगवान् प्रजापति प्रसन्न होते हैं। जिस बर्तावसे वह माताको सन्तुष्ट करता है, उससे पृथ्वी देवीकी भी पूजा हो जाती है तथा जिससे वह उपाध्यायको तृप्त करता है, उसके द्वारा परब्रह्म परमात्माकी पूजा सम्पन्न हो जाती है
yena prīṇāty upādhyāyaṁ tena syād brahma pūjitam |
येन प्रीणात्युपाध्यायं तेनैव ब्रह्म पूज्यते। यथा पितरं प्रीणयति तेन प्रजापतिः प्रीयते; यथा मातरं सन्तोषयति तेन पृथिवीदेवी पूज्यते; यथा चोपाध्यायं तर्पयति तेन परब्रह्म परमात्मा पूजितो भवति॥
भीष्म उवाच