Karma-Phala Rahasya and the Ethics of Dāna (कर्मफल-रहस्यं दानधर्मश्च)
प्रायोपवेशिनो राजन् सर्वत्र सुखमुच्यते । गवाढ्य: शाकदीक्षायां स्वर्गगामी तृणाशन:,राजन! जो आमरण अनशनका व्रत लेकर बैठता है उसके लिये सर्वत्र सुख बताया गया है। शाकाहारकी दीक्षा लेनेपर गोधनकी प्राप्ति होती है और तृण खाकर रहनेवाला पुरुष स्वर्गलोकमें जाता है
राजन्न्, प्रायोपवेशिनः सर्वत्र सुखमुदाहृतम्। शाकदीक्षायां गवाढ्यः स्यात्, तृणाशनः स्वर्गगामी भवेत्॥
भीष्म उवाच