Bhūmi-dānasya Māhātmya
The Pre-eminence of Land-Gift
युधिष्ठिरने कहा--कुरुकुलपुंगव! भरतश्रेष्ठ! बगीचे लगाने और जलाशय बनवानेका जो फल होता है, उसीको अब मैं आपके मुखसे सुनना चाहता हूँ ।। भीष्म उवाच सुप्रदर्शा बलवती चित्रा धातुविभूषिता । उपेता सर्वभूतैश्व श्रेष्ठा भूमिरिहोच्यते,भीष्मजी बोले--राजन्! जो देखनेमें सुन्दर हो, जहाँकी मिट्टी प्रबल, अधिक अन्न उपजानेवाली हो, जो विचित्र एवं अनेक धातुओंसे विभूषित हो तथा समस्त प्राणी जहाँ निवास करते हों, वही भूमि यहाँ श्रेष्ठ बतायी जाती है
bhīṣma uvāca | supradarśā balavatī citrā dhātuvibhūṣitā | upetā sarvabhūtaiś ca śreṣṭhā bhūmir ihocyate ||
युधिष्ठिर उवाच—कुरुकुलपुङ्गव भरतश्रेष्ठ! उद्यानारोपणतडागनिर्माणयोः फलं यत्तदहं भवन्मुखात् श्रोतुमिच्छामि॥ भीष्म उवाच—सुप्रदर्शा बलवती चित्रा धातुविभूषिता। उपेता सर्वभूतैश्च श्रेष्ठा भूमिरिहोच्यते॥
भीष्म उवाच