Brāhmaṇa-mahattva and Atithi-Dharma
Brahmagītā: Praise of Brāhmaṇas and norms of honor
श्येन उवाच ममैतद् विहितं भक्ष्यं न राजंस्त्रातुमरहसि । अकिक्रान्तं च प्राप्तं च प्रयत्नाच्वोपपादितम्,इतनेहीमें बाज भी वहाँ आ गया और बोला--राजन्! विधाताने इस कबूतरको मेरा भोजन नियत किया है। आप इसकी रक्षा न करें। इसका जीवन गया हुआ ही है; क्योंकि अब यह मुझे मिल गया है। इसे मैंने बड़े प्रयत्नसे प्राप्त किया है
śyena uvāca: mamaitad vihitaṃ bhakṣyaṃ na rājaṃs trātum arhasi | akikrāntaṃ ca prāptaṃ ca prayatnāc copapāditam ||
श्येन उवाच— ममैतद्विहितं भक्ष्यं; न राजन् त्रातुमर्हसि। अक्रान्तं च प्राप्तं च प्रयत्नेनोपपादितम्॥
श्येन उवाच