Chapter 2: Sudarśana Upākhyāna — Atithi-Dharma and the Conquest of Mṛtyu
Gṛhastha-Vrata
रक्षिता त्वदगुणैरेषा पतिव्रतगुणैस्तथा । अधृष्या यदियं ब्रूयात् तथा तन्नान्यथा भवेत्,“यह तुम्हारे गुणोंसे तथा अपने पातित्रत्यके गुणोंद्वारा भी सदा सुरक्षित है। कोई भी इसका पराभव नहीं कर सकता। यह जो बात अपने मुहसे निकालेगी वह सत्य ही होगी। मिथ्या नहीं हो सकती
रक्षिता त्वद्गुणैरेषा पतिव्रतगुणैस्तथा । अधृष्या यदियं ब्रूयात् तथा तन्नान्यथा भवेत् ॥
भीष्म उवाच