स ता: पिबन् क्षीरमिव नातृप्पत महामना: । अपूरयन्महौघेन महीं सर्वा च पार्थिव,राजन! ब्राह्मण इस मर्त्यलोक और स्वर्गलोकमें भी अजेय हैं। पहलेकी बात है, महामना अंगिरा मुनि जलको दूधकी भाँति पी गये थे। उस समय उन्हें पीनेसे तृप्ति ही नहीं होती थी। अतः पीते-पीते वे अपने तेजसे पृथ्वीका सारा जल पी गये। पृथ्वीनाथ! तत्पश्चात् उन्होंने जलका महान् स्रोत बहाकर सम्पूर्ण पृथ्वीको भर दिया
sa tāḥ piban kṣīram iva nātṛppata mahāmanāḥ | apūrayan mahaughena mahīṃ sarvāṃ ca pārthiva ||
स ताः पिबन् क्षीरमिव नातृप्यत् महामनाः। अपूरयन्महौघेन महीं सर्वां च पार्थिव॥
अजुन उवाच