Dvaipāyana–Kīṭa Saṃvāda: Karmic Memory, Fear of Death, and Embodied Pleasure
एवं लोकेष्वहिंसा तु निर्दिष्टा धर्मत: पुरा । जैसे हाथीके पैरके चिह्ममें सभी पदगामी प्राणियोंके पदचिह्न समा जाते हैं
एवं लोकेष्वहिंसा तु निर्दिष्टा धर्मतः पुरा ।
भीष्म उवाच