उपदेशदोषप्रसङ्गः (Upadeśa-doṣa-prasaṅgaḥ) — The Risk of Misapplied Counsel
स तं पुरोधाय सुखमवसद् भरतर्षभ | राज्यं शशास धर्मेण प्रजाश्न॒ परिपालयन्,भरतश्रेष्ठी ऋषिको पुरोहित बनाकर वह राजा सुखपूर्वक रहने और धर्मपूर्वक प्रजाका पालन करते हुए राज्यका शासन करने लगा
sa taṃ purodhāya sukham avasad bharatarṣabha | rājyaṃ śaśāsa dharmeṇa prajāś ca paripālayan ||
स तं पुरोधाय सुखमवसद् भरतर्षभ। राज्यं शशास धर्मेण प्रजान् परिपालयन्।
भीष्म उवाच