पदं पदसहस्रेण यश्चरन् नापराध्नुयात् । तेन कर्णेन ते तात कथमासीत् समागम:,तात! जो एक ही लक्ष्यके साथ-साथ सहस्रों लक्ष्योंका वेध करनेके लिये बाण चलाता है और कहीं भी चूकता नहीं है, उस कर्णके साथ तुम्हारा युद्ध किस प्रकार हुआ? बेटा! सारे मनुष्यलोकमें जिनकी समानता करनेवाला कोई नहीं है, उन भीष्मजीके साथ तुम्हारी भिड़न्त किस प्रकार हुई?
padam padasahasreṇa yaś caran nāparādhnuyāt | tena karṇena te tāta katham āsīt samāgamaḥ ||
Вайшампаяна сказал: «Дитя моё, как случилась твоя встреча с Карной — тем, кто, продвигаясь вперёд, способен выпускать стрелы так, чтобы разом поражать тысячу целей и никогда не промахиваться? И как произошло твоё столкновение с Бхишмой, равного которому нет во всём мире людей?»
वैशम्पायन उवाच