Virāṭa-parva Adhyāya 25: Kaurava Deliberation and the Search Directive (अन्वेषण-आदेशः)
नच विद्यो गता येन पार्था: सुदृढविक्रमा: । मार्गमाणा: पदन्यासं तेषु तेषु तथा तथा,मृगोंसे भरे हुए निर्जन वनमें, जो अनेकानेक वृक्षों और लताओंसे व्याप्त, विविध लताओंकी बहुलता एवं विस्तारसे विलसित तथा नाना गुल्मोंसे समावृत है, घूमकर वहाँके विभिन्न स्थानोंमें अनेक प्रकारसे उनके पदचिह्न हम ढूँढ़ते रहे हैं तथापि वे सुदृढ़ पराक्रमी कुन्तीकुमार किस मार्गसे कहाँ गये? यह नहीं जान सके
Vaiśampāyana uvāca: na ca vidyo gatā yena pārthāḥ sudṛḍha-vikramāḥ | mārgamāṇāḥ pada-nyāsaṃ teṣu teṣu tathā tathā ||
Вайшампаяна сказал: «И всё же мы не смогли выяснить, каким путём ушли Партхи, чья доблесть несокрушима. Хотя мы снова и снова, в разных местах, разыскивали следы их шагов, их дорога оставалась неизвестной.»
वैशम्पायन उवाच