द्रौपद्याः भीमसेन-प्रबोधनम्
Draupadī Awakens Bhīmasena
येषां दुन्दुभिनिर्घोषो ज्याघोष: श्रूयतेडनिशम् । तेषां मां मानिनीं भार्या सूतपुत्र: पदावधीत्,“जिनके धनुषकी टंकार सदा देव-दुन्दुभियोंकी गम्भीर ध्वनिके समान सुनायी पड़ती है, उन्हींकी मुझ मानिनी पत्नीको सूतपुत्रने लातसे मारा है
yeṣāṃ dundubhinirghoṣo jyāghoṣaḥ śrūyate 'niśam | teṣāṃ māṃ māninīṃ bhāryāṃ sūtaputraḥ padāvadhīt ||
«Те, у кого звон тетивы слышен непрестанно, как гул божественных барабанов, — жену таких мужей, меня, почитаемую, пнул ногой сын колесничего».
वैशम्पायन उवाच