Keśinī’s Inquiry to Bāhuka and the Emotional Signs of Concealed Identity (केशिन्याः बाहुकपरीक्षा)
तमुवाच ततो राजा त्वरितो गमने नृप । विद्धयक्षहृददयज्ञं मां संख्याने च विशारदम्,“राजन्! आपमें गणितकी यह अद्भुत शक्ति मैंने देखी है। नराधिप! जिस विद्यासे यह गिनती जान ली जाती है, उसे मैं सुनना चाहता हूँ।' राजा तुरंत जानेके लिये उत्सुक थे, अतः उन्होंने बाहुकसे कहा--“तुम मुझे द्यूत-विद्याका मर्मज्ञ और गणितमें अत्यन्त निपुण समझो'
tam uvāca tato rājā tvarito gamane nṛpa | viddhy akṣahṛdayajñaṃ māṃ saṅkhyāne ca viśāradam ||
Тогда царь, спеша в путь, сказал: «Знай: я понимаю самое сердце игры в кости (dyūta) и весьма искусен в счёте».
बृहदश्च उवाच