अक्षहृदय-विद्या-प्रदानम्
Transmission of Akṣa-hṛdaya; Kali’s Exit and the Bibhītaka Refuge
श्रावितश्न मया वाक्य त्वदीयं स महाजने । ऋतुपर्णो महाभागो यथोक्तं वरवर्णिनि,“वहाँ बहुत लोगोंकी भीड़में मैंने तुम्हारा वाक्य महाभाग ऋतुपर्णको सुनाया। वरवर्णिनि! उस बातको सुनकर राजा ऋतुपर्ण कुछ न बोले। मेरे बार-बार कहनेपर भी उनका कोई सभासद् भी इसका उत्तर न दे सका
Там, среди множества людей, о прекрасная, я передал великодушному Ритупарне (Ṛtuparṇa) твои слова — так, как ты велела.
बृहदश्च उवाच