कलेर्द्वापरस्य च नले प्रति कोपः
Kali and Dvāpara’s Resolve Against Nala
कथं तु जातसंकल्प: स्त्रियमुत्सूजते पुमान् । परार्थमीदृशं वक्तुं तत् क्षमन्तु महेश्वरा:,'देवेश्वरो! जिसके मनमें किसी स्त्रीको प्राप्त करनेका संकल्प हो गया है, वह पुरुष उसी स्त्रीको दूसरेके लिये कैसे छोड़ सकता है? अतः आपलोग ऐसी बात कहनेके लिये मुझे क्षमा करें"
«О владыка богов! Как может мужчина, в чьём сердце уже возник замысел обрести женщину, оставить её другому ради чужого дела? Потому да простят меня великие владыки за такие слова.»
बृहृदश्च उवाच