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Shloka 36

सावित्रयुवाच एवमेतद्‌ यथा वेत्थ संकल्पो नान्यथा हि व: । न हि किंचिद्‌ रहस्यं मे श्रूयतां तथ्यमेव यत्‌,सावित्री बोली--मुनीश्वरो! आपलोग जैसा समझते हैं, ठीक है। आपलोगोंका संकल्प अन्यथा नहीं हो सकता। मेरे लिये कोई छिपानेकी बात नहीं है। मैं सब घटनाएँ ठीक-ठीक बताती हूँ, सुनिये

Савитри сказала: «О великий мудрец, всё именно так, как вы знаете. Ваше решение не может быть иным. Мне нечего скрывать. Я поведаю обо всём поистине; слушайте».

गौतम उवाच