Kuntī–Sūrya-saṃvāda: Autonomy, Reputation, and the Promise of Karṇa
स पुत्र निहतं ज्ञात्वा त्रासात् सम्भ्रान्तमानस: । रावण: शोकमोहार्तों वैदेहीं हन्तुमुद्यतः,उस समय घोड़ोंने उस ही खाली रथको लंकापुरीमें पहुँचाया। रावणने देखा, मेरे पुत्रका रथ उसके बिना ही लौट आया है। तब पुत्रको मारा गया जान भयके मारे रावणका मन उदभ्रान्त हो उठा। वह शोक और मोहसे आतुर होकर विदेहनन्दिनी सीताको मार डालनेके लिये उद्यत हो गया
sa putraṁ nihataṁ jñātvā trāsāt sambhrāntamānasaḥ | rāvaṇaḥ śokamohārto vaidehīṁ hantum udyataḥ ||
Маркандейя сказал: Узнав, что его сын убит, Равана в панике лишился душевного равновесия. Охваченный скорбью и омрачением, он вознамерился убить Вайдэхи (Ситу).
मार्कण्डेय उवाच