Sāvitrī’s Trirātra-Vrata and Departure with Satyavān (सावित्रीव्रतनिश्चयः सहगमनं च)
नाहं त्वां सह वैदेहा समेतं कोसलागतम् । द्रक्ष्यामि पृथिवीराज्ये पितृपैतामहे स्थितम्,“जान पड़ता है, जब आप सीताके साथ अयोध्यामें लौटकर पिता-पितामहोंकी परम्परासे प्राप्त हुए इस भूमण्डलके राज्यपर प्रतिष्ठित होंगे, उस समय मैं आपका दर्शन न कर सकूँगा
«Не увижу я тебя, когда ты вместе с Вайдэхой вернёшься в Косалу и утвердишься в царстве над землёй, в наследии от отца и предков.»
मार्कण्डेय उवाच